नई दिल्ली : देश की पहली स्वदेशी परमाणु पनडुब्बी आईएनएस अरिहंत को चुपके से भारतीय नौसेना से शामिल कर लिए जाने की खबर है। यह पनडुब्बी परमाणु हथियार दागने में सक्षम है। यदि इसके शामिल होने की खबर पक्की है तो देश की तीनों सेनाएं अब परमाणु हथियार दागने में सक्षम हो गई हैं। हालांकि रक्षा मंत्रालय और नौसेना ने इस खबर की न तो पुष्टि की है और न ही इसे खारिज किया है कि देश को जमीन, हवा और समुद्र से परमाणु हथियार दागने में सक्षम बनाने के लिए पनडुब्बी को इसी साल अगस्त में शामिल कर लिया गया था। इस संबंध में पूछे जाने पर नौसेना और रक्षा अधिकारियों ने कहा कि उन्हें ऐसी कोई जानकारी नहीं है।
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बुधवार, 19 अक्टूबर 2016
भारतीय नौसेना के हिस्से में आई बड़ी कामयाबी, INS अरिहंत बेड़े में शामिल ! -- एजेंसी
मंगलवार, 18 अक्टूबर 2016
7th Pay Commission – Frustrated Employees Demand Mechanism used in Nandas tenure
सातवें वेतन आयोग (7th Pay Commission) की रिपोर्ट आधिकारिक तौर पर लागू हो गई है. देश में कई स्थानों पर तैनात केंद्र सरकार के अधिकतर कर्मचारियों को इस वेतन आयोग की स्वीकृत सिफारिशों के अनुसार बढ़ा हुआ वेतन मिलने लगा है. लेकिन, सातवें वेतन आयोग की रिपोर्ट की कई बातों को लेकर कर्मचारियों में अब भी असमंजस है और इनके निराकरण का वे बहुत दिनों से इंतजार कर रहे हैं.
कर्मचारी यूनियनों के संयुक्त संगठन एनजेसीए के संयोजक और ऑल इंडिया रेलवे मेंस फेडरेशन के सेक्रेटरी जनरल शिवगोपाल मिश्रा ने बताया कि आज सोमवार को पेंशन की समस्या से जुड़ी समिति की बैठक हुई. इससे पहले भी गुरुवार 13 अक्टूबर को भी इस समिति ने इसी मुद्दे पर चर्चा की थी.
वरिष्ठ सूत्रों के हवाले से खबर है कि मीटिंग में तमाम अलाउंसेस को लेकर चर्चा हुई लेकिन, इसका कोई फायदा नहीं हुआ. यानि कोई सकारात्मक हल अभी तक हुई बैठकों में निकलकर सामने नहीं आया है.
सूत्रों का कहना है कि जहां कर्मचारी संगठन वेतन आयोग (7th Pay Commission) की रिपोर्ट के अनुसार ही पेंशन से जुड़ी समस्या का समाधान चाहते हैं वहीं, सरकार की ओर से कहा जा रहा है कि उनके पास बढ़िया विकल्प है. फिलहाल सरकार ने अभी तक इस बारे में कर्मचारी नेताओं से ज्यादा कुछ नहीं कहा है.
उधर, खबर है कि न्यूनतम वेतनमान का मुद्दा 24 तारीख को होने वाली संबंधित कमेटी की बैठक में रखा जाएगा. इस दिन बैठक के लिए यह मुद्दा निर्धारित किया गया है. वहीं 25 अक्टूबर को डीओपीटी के सचिव की अध्यक्षता में गठित स्टैंडिंग कमेटी की बैठक होगी.
जानकारी के अनुसार वेतन आयोग (7th pay commission) से जुड़े तमाम मुद्दों के हल के लिए कर्मचारी संगठन की मांग है कि सरकार गुलजारी लाल नंदा के कार्यकाल में बनी नेगोशिएशन मशीनरी को पुन: कार्यान्वित करे. गुलजारी लाल नंदा ने बतौर कैबिनेट मंत्री एक जेसीएम (ज्वाइंट कंसेल्टिंग मशीनरी) का गठन किया था. यह केंद्रीय कर्मचारियों की मशीनरी थी. कर्मचारी नेताओं का मानना है कि उस दौरान केंद्रीय कर्मचारियों की समस्याओं से जुड़े मुद्दों के हल के लिए विशेष व्यवस्था की गई थी. इस प्रकार के सिस्टम की फिर से जरूरत महसूस की जा रही है. नंदा के कार्यकाल में इस प्रकार की समिति का प्रमुख कैबिनेट सेक्रेटरी हुआ करता था.
सातवें वेतन आयोग की रिपोर्ट की रिपोर्ट 1 जनवरी 2016 से लागू हो गई है और करीब दो महीनों से केंद्रीय कर्मचारियों को इसके अनुसार बढ़ा हुआ वेतन मिलने भी लगा है, लेकिन अभी कर्मचारियों में इसके लेकर उतनी खुशी नहीं है. कई कर्मचारियों का कहना है कि अभी तक ऐसा नहीं लग रहा है जैसे वेतन आयोग की रिपोर्ट लागू हो गई है.
इसके पीछे का सबसे बड़ा कारण अलाउंसेस को लेकर बना असमंजस है. पहले केंद्रीय कर्मचारी 196 किस्म के अलाउंसेस के हकदार थे. लेकिन सातवें वेतन आयोग ने कई अलाउंसेस को समाप्त कर दिया या फिर उन्हें मिला दिया जिसके बाद केवल 55 अलाउंस बाकी रह गए. तमाम कर्मचारियों को कई अलाउंस समाप्त होने का मलाल है. क्योंकि कई अलाउंस अभी तक लागू नहीं हुए और कर्मचारियों को उसका सीधा लाभ नहीं मिला है तो कर्मचारियों को लग रहा है कि वेतन आयोग की रिपोर्ट अभी लागू नहीं हुई है.
उधर, कर्मचारी नेताओं का कहना है कि वह स्टैंडिंग कमेटी की अगली बैठक में इस मुद्दे पर सरकार पर दबाव बनाएंगे.
Source: NDTV
बुधवार, 12 अक्टूबर 2016
'पाकला शांततेची नव्हे "सर्जिकल'ची भाषा समजते' - वृत्तसंस्था
नवी दिल्ली - चीनवर अवलंबून असलेल्या अकार्यक्षम पाकिस्तानला शांततेची नव्हे तर केवळ सर्जिकलची प्रक्रियाच समजते, अशा शब्दांत बलुचिस्तानमधील बलोच महिला मंचच्या अध्यक्षा आणि बलुचिस्तानच्या चळवळीतील कार्यकर्त्या नैला क्वाद्री बलोच यांनी पाकिस्तानवर टीका केली आहे.
भारत भेटीवर आलेल्या नाईला वृत्तसंस्थेशी बोलताना म्हणाल्या, "शांततापूर्ण निषेधाने पाकिस्तानवर काही परिणाम होईल असे मला वाटत नाही. पाकिस्तानला केवळ सर्जिकलची प्रक्रियाच समजते. कारण तेथे सत्ता करत असलेले जनरल्स (लष्कर) शांततपूर्ण गोष्टी ऐकून घेत नाहीत. त्यांचा लोकशाहीवर, लोकांच्या मतांवर आणि मानवी हक्कांवर विश्वास नाही.‘ तसेच ‘पाकिस्तानचे कान अद्यापही उघडलेले नाहीत. भारताच्या राजधानी दिल्लीतील पाकिस्तानच्या उच्चायुक्तासमोर बलुचिस्तानमधील कार्यकर्त्यांनी अलिकडेच निषेध व्यक्त केला होता. पाकिस्तानच्या लष्कराने बलुचिस्तानमधून आपले सैन्य मागे हटवावे आणि तेथे होत असलेला हिंसाचार थांबवावा अशी मागणी केली होती‘, असेही नैला पुढे म्हणाल्या. "पाकिस्तान बलुचिस्तानसोबत कधीही युद्ध करू शकत नाही. स्थानिकांच्या संसाधनांचे शोषण करून तेथील जनरल्स (लष्कर) ऐश करत आहेत‘, असा आरोपही त्यांनी केला.
रक्षा मंत्री ने आसियान देशों से आतंकवाद के सभी रूपों के खिलाफ दृढ़ता से लड़ने का आह्वान किया
हाल के दिनों में आतंकवाद की बढ़ती घटनाओं पर चिंता जताते हुए रक्षा मंत्री श्री मनोहर पर्रिकर ने कहा कि गैर पारंपरिक खतरे और आतंकवाद दक्षिण पूर्व एशिया क्षेत्र के लिए सबसे महत्वपूर्ण चुनौतियों बन गए हैं। उन्होंने हर जगह सख्ती से आतंकवाद का विरोध करने, आतंकवाद का राज्य नीति के एक औजार की तरह प्रयोग को अवैध घोषित करने तथा आतंकवादी नेटवर्कों का पता लगाने और ध्वस्त करने में बिना किसी संशय के सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया। श्री पर्रिकर रक्षा मंत्रालय के तत्वावधान में नई दिल्ली के नेशनल डिफेंस कॉलेज (एनडीसी) द्वारा आयोजित रक्षा विश्वविद्यालयों के प्रमुखों/कालेजो/संस्थाओं की बैठक (एचडीयूसीआईएम) जोकि 20वीं आसियान क्षेत्रीय फोरम (एआरएफ) का एक भाग है, को संबोधित कर रहे थे।
रक्षामंत्री ने कहा कि समुद्री क्षेत्र समृद्धि के लिए एक मुख्य आधार है, जो कई तरह के संकटों से घिरा है। उन्होंने नौवहन की स्वतंत्रता, ऊपर से उड़ान तथा अबाधित वैध वाणिज्य के लिए भारत के समर्थन को दोहराया जो अंतर्राष्ट्रीय कानूनों के सिद्धांत पर आधारित है और विशेष रूप से संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन समुद्रीय कानून (यूएनसीएलओएस) में परिलक्षित होता है। उन्होंने कहा, भारत का मानना है कि राज्यों को धमकी या बल उपयोग के बिना शांतिपूर्ण साधनों के माध्यम से ही विवादों को हल करना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत की इंडो-पसिफ़िक क्षेत्र के तरफ विस्तृत सोच प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के द्वारा पुनः परिभाषित शब्द सागर (एसएजीएआर) से परिलिक्षित होती है जिसका मतलब हैक्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा एवं विकास। रक्षा मंत्री ने आगे कहा कि भारत न केवल अपने भू-भाग एवं समुद्री क्षेत्रों तथा हितों की रक्षा करने के प्रति प्रतिबद्ध है। अपितु वह अपनी क्षमताएं अन्य क्षेत्रीय देशों के लिए भी उपलब्ध करवायेगा।उन्होंने सदस्य देशों का आह्वान करते हुए कहा कि हमें आसियान क्षेत्रीय मंच की दक्षता और गतिशीलता में और अधिक वृद्धि करनी चाहिए तथा जलवायु परिवर्तन, अंतरिक्ष एवं साइबर सुरक्षा जैसी गैर पारंपरिक सुरक्षा चुनौतियों के लिए बहु-राष्ट्रीय प्रतिक्रियाओं पर सहयोग बढ़ाने चाहिए।
इस तीन दिवसीय बैठक में23 सदस्य देशों और चीन, जापान, फिलीपींस, वियतनाम, रूस, यूरोपीय संघ और आसियान सचिवालय जैसे संगठनों के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। भारत ने पिछली बार इस बैठक की मेजबानी नई दिल्ली में अक्टूबर 2003 में की थी।बैठक में चर्चा का मुख्य विषय '21 वीं सदी की चुनौतियों का सामना करने के लिए सैन्य शिक्षा में परिवर्तन' होगा। भाग लेने वाले देश ‘कुशल और प्रभावी सैन्य नेतृत्व की समकालीन चुनौतियों को पेशेवर सैन्य शिक्षा के द्वारा कैसे पुनर्जीवित किया जाए’ इस बारे में विस्तृत विचार-विमर्श करेंगे। वे पेशेवर सैन्य शिक्षा (PME) में नवशक्ति संचार के जरियेगैर पारंपरिक खतरों जैसे प्राकृतिक आपदाओं, महामारियों, अंतरराष्ट्रीय अपराधों एवं जनसांख्यिकीय मुद्दों का मुकाबला करने के लिए क्षमता निर्माण करने पर भी चर्चा करेंगे। अंत मेंबेहतर आपसी विश्वास और समझ के लिए प्रभावी बचाव कूटनीति को बढ़ावा देने पर एक विचार विमर्श सत्र का आयोजन होगा।
बैठक की अध्यक्षता लेफ्टिनेंट जनरल एनएस घई, कमांडेंट, एनडीसी ने की तथा उनके फिलीपींस समकक्ष श्री रोनाल्डो जी जंगो, निदेशक, फिलीपींस नेशनल डिफेंस कॉलेज, बैठक के सह-अध्यक्ष थे।
नौसेना प्रमुख एडमिरल सुनील लांबा का समुद्री सुरक्षा के लिए व्यापक सहयोग का आह्वान
नौसेना प्रमुख एडमिरल सुनील लांबा ने हिंद महासागर क्षेत्र (आईओआर) में समुद्री सुरक्षा बढ़ाने के लिए सहयोगपूर्ण भागीदारी के महत्व को दोहराया है।नेवल वार कॉलेज द्वारा प्रथम बार आयोजित गोवा समुद्री विचार गोष्ठी का शुभारंभ करते हुए श्री लांबा ने कहा कि नौसेना की हमेशा से ही ऐसी सोच रही है और यह सरकार की सागर (क्षेत्र में हर किसी के लिए सुरक्षा और विकास) की समावेशी विकास की पहल के अनुरूप है। एडमिरल लांबा ने इस पहल के लिए कॉलेज की सराहना की और पहले क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा कोर्स में ग्रेजुएट कर रहे अंतरराष्ट्रीय अधिकारियों को पुरस्कृत किया। उन्होंने अधिकारियों से ज्ञान के साथ आगे आने और गोवा में रुकने के दौरान भागीदारी को बेहतर और ज्यादा सुरक्षित भविष्य के लिए विकसित करने का आह्वान किया।
दो दिवसीय विचार गोष्ठी में क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा को मजबूत बनाना, हिंद महासागर क्षेत्र में अंतर सक्रियात्मकता बढ़ाना, नौचालन की स्वतंत्रता की चुनौतियां और आईओआर में समुद्री सुरक्षा की चुनौतियों का मूल्यांकन किया गया। इन विषयों में से प्रत्येक में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के जाने-माने वक्ताओं एडमिरल राजा मेनन, अरुण प्रकाश, सुरेश मेहता, विजय शंकर, प्रदीप चौहान, कमोडोर उदय भास्कर, प्रोफेसर जिओफ्रे टिल, विजय सखूजा, दत्तेश पारुलेकर और टोमोको कियोता ने अपने विचार प्रस्तुत किए। विचार गोष्ठी में बांग्लादेश, इंडोनेशिया, मलेशिया, मालदीव, म्यांमार और श्रीलंका के वरिष्ठ अधिकारियों ने सक्रिय भागीदारी की और अनुभव, सरोकारों और संबंधित देशों के दृष्टिकोण को प्रस्तुत किया।
नेवी वार कॉलेज के कमांडेट रियर एडमिरल मोंटी खन्ना ने अपने संबोधन में कहा कि ‘हर उप-विषय में व्यापक चर्चा की गई और हमने क्षेत्रीय सुरक्षा तंत्र के कई पहलुओं पर विचार विमर्श किया। इसके साथ ही भविष्य की समुद्री चुनौतियों और उनका सफलतापूर्वक सामना करने पर चर्चा की।
इस विचार गोष्ठी के दौरान मुख्य रूप से समुद्री जागरूकता पर ध्यान केंद्रित किया गया जिससे भागीदारी प्रणाली को मजबूत बनाया जा सके। इस दौरान भारतीय नौसेना की वर्ष 2008 से जारी पहल इंडियन ओसन नेवल सिंपोजियम (आईओएनएस) जैसी मौजूदा प्रणाली को मजबूत बनाने का भी सुझाव दिया गया।
लखनऊ के ऐशबाग रामलीला मैदान में दुशहरा महोत्सव में प्रधानमंत्री द्वारा दिए गये भाषण का मूल पाठ
जय श्री राम, विशाल संख्या में पधारे प्यारे भाईयों और बहनों,
आप सबको विजयादशमी की अनेक-अनेक शुभकामनाएं। मुझे आज अति प्राचीन रामलीला, उस समारोह में सम्मिलित होने का सौभाग्य मिला है। हिन्दुस्तान की धरती का ये वो भू-भाग है, जिस भू-भाग ने दो ऐसे तीर्थरूप जीवन हमें दिए हैं- एक प्रभु राम और दूसरे श्री कृष्ण, इसी धरती से मिले। और ऐसी धरती पर विजयादशमी के पर्व पर आ करके नमन करना, इससे बड़ा जीवन का सौभाग्य क्या हो सकता है?
विजयादशमी का पर्व असत्य पर सत्य की विजय का पर्व है। आताताई को परास्त करने का पर्व है। हम रावण को तो हर वर्ष जलाते हैं, आखिरकार इस परम्परा से हमें क्या सबक लेना है? रावण को जलाते समय हमारा एक ही संकल्प होना चाहिए कि हम भी हमारे भीतर, हमारी सामाजिक रचना में, हमारे राष्ट्रीय जीवन में जो-जो बुराइयां हैं, उन बुराइयों को भी ऐसे ही खत्म करके रहेंगे। और हर वर्ष रावण जलाते समय हमने हमारी बुराइयों को खत्म करने के संकल्प को भी मजबूत बनाना चाहिए, और उसमें विजयादशमी के समय हिसाब-किताब भी करना चाहिए कि हमने कितनी बुराइयों को खत्म किया।
आज शायद उस समय का रावण का रूप नहीं होगा; आज शायद उस समय के जैसी राम और रावण की लड़ाई भी नहीं होगी, लेकिन हमारे भीतर अंतरद्वंध एक अविरल चलने वाली प्रक्रिया है, और इसलिए हमारे भीतर भी ये दशहरा जो शब्द है, उसका एक संदेश तो ये भी है कि हम हमारे भीतर की दस कमियों को हरें, उसको खत्म करें - दशहरा, उसको खत्म करें, जीवन को पतन लाने वाली जितनी-जितनी चीजें हैं, उस पर विजय प्राप्त किए बिना जीवन कभी सफल नहीं होता है। हर एक के अंदर सब कुछ समाप्त करने का सामर्थ्य नहीं होता है, लेकिन हर एक में ऐसी बुराइ्यों को समाप्त करने के प्रयास करने का सामर्थ्य तो ईश्वर ने दिया होता है, और इसमें समाज के नाते, व्यक्ति के नाते, राष्ट्र के नाते हमारे भीतर विचार के रूप में; आचार के रूप में; ग्रन्थियों के रूप में; बुरी सोच के रूप में; जो रावण बस रहा है, उसे भी हम लोगों ने समाप्त करके ही इस राष्ट्र को गौरवशाली बनाना होगा।
मैं इस समिति का इसलिए आभारी हूं कि जैसे लोकमान्य तिलक जी ने गणेश-उत्सव को सार्वजनिक उत्सव बना करके सामाजिक चेतना जगाने के लिए एक अवसर के रूप में परिवर्तित किया था, आपने भी इस रामलीला के मंचन को सिर्फ पुरानी चीजों को भक्ति भाव से याद करने तक सीमित नहीं रखा, एक कौतुहलवश नई पीढ़ी देखने के लिए आ जाए, कलाकारों को अवसर मिल जाए, इसलिए नहीं किया। लेकिन आपने हर रामलीला के समय समाज के अंदर जो बुराइयां हैं, ऐसी कोई न कोई बुराइयां, या समाज में जो कोई अच्छाई उभारनी है, उस अच्छाई के ऊपर केन्द्रित करते हुए आपने इस रामलीला के मंचन की परम्परा खड़ी की है। मैं समझता हूं कि अद्भुत और पूरे देश के लोगों ने प्रेरणा प्राप्त करने जैसा ये काम यहां की रामलीला के द्वारा हो रहा है। और उस रामायण के पात्रों के माध्यम से भी हम आधुनिक जीवन के लिए संदेश दे सकते हैं, सामर्थ्य है उसमें। और ये देश की विशेषता यही है कि हजारों साल से हमारे यहां हमारी सांस्कृतिक विरासत को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुंचाने की यही तो सबसे बड़ी व्यवस्था रही है कि कथा के द्वारा, कला के द्वारा हमने इस परम्परा को जीवित रखा है, और उसका अपना एक समाज जीवन में महामूल्य होता है।
इस बार का मंचन का विषय रहा है आतंकवाद। आतंकवाद ये मानवता का दुश्मन है, और प्रभु राम मानवता का प्रतिनिधित्व करते हैं; मानवता के उच्च मूल्यों का प्रतिनिधित्व करते हैं; मानवता के आदर्शों का प्रतिनिधित्व करते हैं; मर्यादाओं को रेखांकित करते हैं; और विवेक, त्याग, तपस्या, उसकी एक मिसाल हमारे बीच छोड़ करके गए हैं। और इसलिए और आतंकवाद के खिलाफ सबसे पहले कौन लड़ा था? कोई फौजी था क्या? कोई नेता था क्या?
रामायण गवाह है कि आतंकवाद के खिलाफ सबसे पहले लड़ाई किसी ने लड़ी थी तो वो जटायु ने लड़ी थी। एक नारी के सम्मान के लिए रावण जैसी सामर्थ्यवान शक्ति के खिलाफ एक जटायु जूझता रहा, लड़ता रहा। आज भी अभय का संदेश कोई देता है तो जटायु देता है। और इसलिए सवा सौ करोड़ देशवासी- हम राम तो नहीं बन पाते हैं, लेकिन अनाचार, अत्याचार, दुराचार के सामने हम जटायु के रूप में तो कोई भूमिका अदा कर सकते हैं। अगर सवा सौ करोड़ देशवासी एक बन करके आतंकवादियों की हर हरकत पर अगर ध्यान रखें, चौकन्ने रहें तो आतंकवादियों का सफल होना बहुत मुश्किल होता है।
आज से 30-40 साल पहले जब हिन्दुस्तान दुनिया को हमारी आतंकवाद के कारण जो परेशानियां हैं, उसकी चर्चा करता था तो विश्व के गले नहीं उतरता था। 92-93 की घटना मुझे याद है, मैं अमेरिका के State Department के State Secretary से बात कर रहा था और जब मैं आतंकवाद की चर्चा करता था तो वो मुझे कह रहे थे ये तो आपका Law & Order problem है। मैं उनको समझा रहा था कि Law & Order problem नहीं है, आतंकवाद कोई और चीज है, उनके गले नहीं उतरता था। लेकिन 26/11 के बाद सारी दुनिया के गले उतर गया है आतंकवाद कितना भयंकर होता है। और कोई माने कि हम तो आतंकवाद से बचे हुए हैं तो गलतफहमी में न रहें, आतंकवाद को कोई सीमा नहीं है, आतंकवाद को कोई मर्यादा नहीं है, वो कहीं पर जा करके किसी भी मानवतावादी चीजों को नष्ट करने पर तुला हुआ है। और इसलिए विश्व की मानवतावादी शक्तियों का आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होना अनिवार्य हो गया है। जो आतंकवाद करते हैं उनको जड़ से खत्म करने की जरूरत पैदा हुई है। जो आतंकवाद को पनाह देते हैं, जो आतंकवाद को मदद करते हैं, अब तो उनको भी बख्शा नहीं जा सकता है। पूरा विश्व तबाह हो रहा है, दो दिन से हम टीवी पर सीरिया की एक छोटी बालिका का चित्र देख रहे हैं; दो दिन से हम सीरिया की एक छोटी बालिका का चित्र देख रहे हैं टीवी पर, आंख में आंसू आ जाते हैं। किस प्रकार से निर्दोषों की जान ली जा रही है। और इसलिए आज जब हम रावण वध और रावण को जला रहे हैं, तब पूरे विश्व ने, सिर्फ भारत ने नहीं, सिर्फ मुझे और आपने नहीं, पूरे विश्व की मानवतावादी शक्तियों ने आतंकवाद के खिलाफ एक बन करके लड़ाई लड़नी ही पड़ेगी। आतंकवाद को खत्म किए बिना मानवता की रक्षा संभव नहीं होगी।
भाइयो, बहनों जब मैं समाज के भीतर हमारे यहां जो बुराइयां हैं, उसको भी हमें नष्ट करना होगा, और यही विजयादशमी से हमें प्रेरणा लेनी चाहिए। रावण रूपी वो बातें छोटी होंगी, लेकिन वो भी एक प्रकार की रावण रूप ही है। दुराचार, भ्रष्टाचार, हमारे समाज को तबाह करने वाले ये रावण नहीं हैं तो क्या हैं? इसको भी हमें खत्म करने के लिए देश के नागरिकों को संकल्पबद्ध होना पड़ेगा।
गंदगी, ये भी रावण का ही एक छोटा सा रूप ही है। ये गंदगी है जो हमारे गरीब बच्चों की जान ले लेती है। बीमारी गरीब परिवारों को तबाह कर देती है। अगर हम गंदगी से मुक्ति पाएं, गंदगी रूपी रावण से मुक्ति पाएं, तो देश के करोड़ों-करोड़ों परिवार जो अल्पायु में मौत के शरण हो जाते हैं; बीमारी के शिकार हो जाते हैं; उनको हम बचा सकते हैं। अशिक्षा, अंधश्रद्धा, ये भी तो समाज को नष्ट करने वाली हमारी कमियां हैं। और उससे भी मुक्ति पाने के लिए हमें संकल्प करना होगा।
आज एक तरफ हम विजयादशमी का पर्व मना रहे हैं, तो उसी समय पूरा विश्व आज Girl Child Day भी मना रहा है। आज Girl Child Day भी है। मैं जरा अपने-आप से पूछना चाहता हूं, मैं देशवासियों से पूछना चाहता हूं, कि एक सीता माता के ऊपर अत्याचार करने वाले रावण को तो हमने हर वर्ष जलाने का संकल्प किया हुआ है, और जब तक पीढि़यां जीती रहेंगी रावण को जलाते रहेंगे क्योंकि सीता माता का अपहरण किया था; लेकिन कभी हमने सोचा है कि जब पूरा विश्व आज Girl Child Day मना रहा है तब हम बेटे और बेटी में फर्क करके मां के गर्भ में कितनी सीताओं को मौत के घाट उतार देते हैं। ये हमारे भीतर के रावण को खत्म कौन करेगा? क्या आज भी 21वीं शताब्दी में मां के गर्भ में बेटियों को मारा जाएगा? अरे एक सीता के लिए जटायु बलि चढ़ सकता है, तो हमारे घर में पैदा होने वाली सीता को बचाना हम सबका दायित्व होना चाहिए। घर में बेटा पैदा हो, जितना स्वागत-सम्मान हो, बेटी पैदा हो उससे भी बड़ा स्वागत-सम्मान हो, ये हमें स्वभाव बनाना होगा।
इस बार ओलंपिक में देखिए, हमारे देश की बेटियों ने नाम को रोशन कर दिया। अब ये बेटी-बेटे का फर्क हमारे यहां रावण रूपी मानसिकता का ही अंश है। शिक्षित हो; अशिक्षित हो, गरीब हो; अमीर हो, शहरी हो; ग्रामीण हो, हिन्दू हो; मुसलमान हो, सिख हो; इसाई हो, बौद्ध हो; किसी भी सम्प्रदाय के क्यों न हो; किसी भी आर्थिक पार्श्वभूमि के क्यों न हो; किसी भी सामाजिक पार्श्वभूमि के क्यों न हो, लेकिन बेटियां समान होनी चाहिए; महिलाओं के अधिकार समान होने चाहिए, महिलाओं को 21वीं सदी में न्याय मिलना चाहिए कि किसी भी परम्परा से जुड़े क्यों न हों; किसी भी समाज से जुड़े क्यों न हों, महिलाओं का गौरव करने का ये युग हमें स्वीकारना होगा। बेटियों का गौरव करना होगा; बेटियों को बचाना होगा। हमारे भीतर ऐसे जो रावण के रूप बिखरे पड़े हैं उससे इस देश को हमें मुक्ति दिलानी है। और इसलिए जब लक्ष्मण की नगरी में आया हूं, गोस्वामी तुलसीदास की धरती पर आया हूं। श्रीकृष्ण के जीवन में भी युद्ध था, राम के जीवन में भी युद्ध था, लेकिन हम वो लोग हैं जो युद्ध से बुद्ध की ओर चले जाते हैं। समय के बंधनों से, परिस्थिति की आवश्यकताओं से युद्ध कभी-कभी अनिवार्य हो जाते हैं, लेकिन ये धरती का मार्ग युद्ध का नहीं, ये धरती का मार्ग बुद्ध का है। और ये देश; ये देश सुदर्शन चक्करधारी मोहन को युगपुरुष मानता है, जिसने युद्ध के मैदान में गीता कही; यही देश चरखाधारी मोहन, जिसने अहिंसा का संदेश दिया, उसको भी युगपुरुष मानता है। यही इस देश की विशेषता है कि दोनों तराजु पर हम संतुलन ले करके चलने वाले लोग हैं। और इसलिए हम युद्ध से बुद्ध की यात्रा वाले लोग हैं। हम हमारे भीतर के रावण को खत्म करने का संकल्प करने वाले लोग हैं। हमारे देश को सुजलाम-सुफलाम बनाने का संकल्प करके निकले हुए लोग हैं।
ऐसे समय अति प्राचीन ये रंगमंच जहां रामलीला होती हैं, अनेक पीढि़यों के बालक कभी राम और लक्ष्मण के रूप में, मां सीता के रूप मे इसी स्थान पर उनकी चरण-रज पड़ी होगी और वो पल वो इन्सान नहीं रहते; वो भक्ति में लीन हुए होते हैं, वो पात्र नहीं होते हैं; वो परमात्मा का रूप बन जाते हैं। उसी मंच पर आ करके आज इन सब रावणों के खिलाफ जो हमारे भीतर हैं, चाहे जातिवाद हो, चाहे वंशवाद हो, चाहे ऊंच-नीच की बुराई हो, चाहे सम्प्रदायवाद का जनून हो, ये सारी बुराइयां किसी न किसी रूप में बिखरा पड़ा रावण का ही रूप है। और इससे मुक्ति पाना, इसे खत्म करना, और एकात्म हिन्दुस्तान; एकरस हिन्दुस्तान; समरस हिन्दुस्तान इसी सपने को पार करने का संकल्प करके इस विजयादशमी के पावन पर्व पर हम बस प्रभु रामजी के हम पर आशीर्वाद बने रहें, मानवता के मार्ग पर चलने की हमें ताकत मिले, बुद्ध का मार्ग हमारा अन्तिम मार्ग बना रहे।
इसी एक अपेक्षा के साथ आप सबको विजयादशमी की बहुत-बहुत शुभकामनाएं। मेरे साथ पूरी ताकत से बोलिए जय श्रीराम। आवाज दूर-दूर तक जानी चाहिए। जय श्रीराम, जय श्रीराम, जय जय श्रीराम, जय जय श्रीराम।
- अतुल कुमार तिवारी/ अमित कुमार / निर्मल शर्मा
शनिवार, 2 जुलाई 2016
हल्का लड़ाकू विमान ‘ तेजस ‘ भारतीय वायु सेना के 45वें स्क्वाड्रन में शामिल
हल्का लड़ाकू विमान ‘ तेजस ‘ 01 जुलाई, 2016 को भारतीय वायु सेना के 45वें स्क्वाड्रन में शामिल हो गया। 45वें स्क्वाड्रन को ‘ फ्लाइंड डैगर्स ‘ कहा जाता है। पहले यह स्क्वाड्रन एमऐआईजी 21 बीआईएस विमान से सुसज्जित था और इसका संचालन नलिया से किया जाता था। इसका नारा है “ अजीत नभ “। लगभग दो वर्षों तक इस विमान का संचालन बंगलुरु से किया जाएगा । इसके बाद संचालन कोयम्बटूर के निकट निर्धारित स्थान सुलुर से किया जाएगा। यह पहला लड़ाकू विमान है जो तिरुअनंतपुरम स्थित भारतीय वायु सेना के दक्षिणि एयर कमान का हिस्सा होगा।
‘ फ्लाइंड डैगर्स ‘ के कमांडिंग ऑफिसर ग्रुप कैप्टन माधव रंगचारी हैं। ग्रुप कैप्टन माधव रंगचारी राष्ट्रीय रक्षा अकादमी के कैडेट रहे हैं। मिराज-2000 तथा मिग 21 के संचालन अनुभव के अतिरिक्त उन्हें प्रोटोटाइप हल्के लड़ाकू विमान के उड़ान प्रशिक्षण का अनुभव है।
‘ तेजस ‘ भारत में डिजायन किया , विकसित और निर्मित है। इसकी परिकल्पा मिग21 को बदलने के लिए की गई और इसकी डिजायनिंग और विकास का काम एरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (एडीए) द्वारा किया गया है। यह हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड(एचएएल) द्वारा निर्मित है। इसके डिजायनरों, निर्माताओं, तकनीकी विशेषज्ञों और जांच दल को इस बात का श्रेय जाता है कि यह हल्का लड़ाकू विमान बिना कोई दुर्घटना के 2000 घंटे में 3000 उड़ान भर चुका है। यह चार प्लस पीढ़ी का विमान है । इसका कॉकपिट शीशे का है और अत्याधुनिक सेटेलाइट सुविधा संपन्न मजबूत नौवहन प्रणाली से लैस है। इसमें डिजिटल कंप्यूटर आधारित हमला प्रणाली और ऑटोपायलट है। य़ह हवा से हवा में प्रक्षेपास्त्र , बम तथा स्पष्टता निर्देशित हथियार दाग सकता है।
विमान को चरणबद्ध तरीके से शामिल करने की योजना बनाई जा रही है। आईओसी विमान हवा से हवा में निकट से प्रक्षेपास्त्र दागने , हेलमेट माउंटेड डिस्प्ले तथा लेसर निर्देशित बम जैसे स्पष्ट निशाना लगाने वाले हथियारों से लैस है। ऐसे विमान बिना किसी निर्देश के भी स्पष्टता के साथ बम गिरा सकते हैं क्योंकि इसमें अत्यधिक विकसित स्वदेशी मिशन कंप्यूटर है। एफओसी विमान दृष्टि क्षेत्र से आगे निशाना साधने वाले प्रक्षेपास्त्रों को शामिल करेगा। इसमें बेहतर स्टैंड ऑफ हथियार और एयर टू एयर ईंधन भरने की सुविधा है। भारतीय वायु सेना अतिरिक्त हल्के लड़ाकू विमान एमके ए1 लाने के प्रयास में है । इसमें नई पीढ़ी का एक्टिव इलेक्ट्रानिकली स्कैन्ड अरै राडार होगा और एक साथ हवा से हवा और हवा से जमीन की क्षमता होगी।
45वें स्क्वाड्रन का संचालन आज से शुरु हुआ और ‘ तेजस ‘ बहुत जल्द भारतीय आकाश की रक्षा में लग जाएगा।